स्थान: गौरवगढ़, सुपौल
विद्यालय: सार्थक प्राइमरी एकेडमी
दिनांक: 12 जनवरी 2026
विद्यालय: सार्थक प्राइमरी एकेडमी
दिनांक: 12 जनवरी 2026
राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर दिनांक 12 जनवरी 2026 को सार्थक प्राइमरी एकेडमी, सुपौल में बच्चों के लिए एक विशेष निःशुल्क नामांकन अभियान का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम स्वामी विवेकानंद जी की जयंती के उपलक्ष्य में रखा गया था। इस अवसर पर बड़ी संख्या में अभिभावक अपने बच्चों के साथ विद्यालय पहुँचे और इस विशेष सुविधा का लाभ उठाया। यह विद्यालय रामकृष्ण मिशन, सैनिक स्कूल, नवोदय विद्यालय, सिमुलतला आवासीय विद्यालय तथा अन्य विद्यालय स्तरीय प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कराता है।
स्वामी विवेकानंद जी को श्रद्धांजलि से हुई कार्यक्रम की शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 8:00 बजे स्वामी विवेकानंद जी की जयंती मनाने के साथ हुई। विद्यालय के सभी शिक्षकों ने स्वामी विवेकानंद जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर विद्यालय परिसर में एक प्रेरणादायक वातावरण देखने को मिला।
इस कार्यक्रम में कौशल किशोर यादव, कमलेश्वरी यादव, रूपेश कुमार और उज्जवल आनंद भी उपस्थित रहे। उन्होंने बच्चों और अभिभावकों को स्वामी विवेकानंद जी के विचारों और उनके जीवन से प्रेरणा लेने की बात कही।
विद्यालय के निदेशक राजन सर और विद्यालय के एकेडमिक एडवाइजर रोहित सर ने स्वामी विवेकानंद जी के विचारों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि किस प्रकार उनके सिद्धांत बच्चों के जीवन को उज्ज्वल बना सकते हैं। उन्होंने बच्चों को आत्मविश्वासी, अनुशासित और लक्ष्य के प्रति समर्पित बनने की प्रेरणा दी।
सुबह 8:30 बजे से शाम 5:00 बजे तक चला निःशुल्क नामांकन
स्वामी विवेकानंद जी की जयंती के बाद सुबह 8:30 बजे से शाम 5:00 बजे तक बच्चों के लिए निःशुल्क नामांकन लिया गया। दूर-दूर से आए अभिभावक अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की आशा लेकर विद्यालय पहुँचे।
विद्यालय में प्रवेश करते ही सबसे पहले सभी अभिभावक इंक्वायरी काउंटर पर पहुँचे, जहाँ उन्हें विद्यालय से जुड़ी सभी जानकारी दी जा रही थी।
इंक्वायरी काउंटर पर अभिभावकों को दी गई पूरी जानकारी
इंक्वायरी काउंटर पर सत्यनारायण ठाकुर, सतीश सर और एस. सी. बासु सर अभिभावकों का स्वागत कर रहे थे। वे बड़े ही सरल शब्दों में अभिभावकों को विद्यालय से जुड़ी हर जानकारी दे रहे थे, जैसे—फ्री एडमिशन के फायदे, बच्चों को मिलने वाली शैक्षणिक सुविधाएँ, हॉस्टल की सुविधा, ट्रांसपोर्ट सुविधा, किताबें और यूनिफॉर्म, वार्षिक परीक्षा, अर्धवार्षिक परीक्षा, अन्य शैक्षणिक गतिविधियाँ।
इसके साथ ही वे यह भी बता रहे थे कि इस विद्यालय में पढ़ने से बच्चों को भविष्य की प्रतियोगी परीक्षाओं में कैसे लाभ मिलेगा।
जब अभिभावक पूरी जानकारी से संतुष्ट हो जाते थे, तब वे अपने बच्चों को अगले चरण यानी एडमिशन टेस्ट काउंटर पर भेजते थे।
बच्चों का लिया गया प्रवेश परीक्षा (एडमिशन टेस्ट)
एडमिशन काउंटर पर बच्चों का छोटा सा टेस्ट लिया जा रहा था ताकि यह तय किया जा सके कि बच्चे को किस कक्षा में पढ़ाया जाए। यह कार्य विद्यालय के अनुभवी शिक्षक कर रहे थे, जिनमें- रामकृष्ण सर, अजीत सर, कुंदन सर और शिक्षिकाएँ- मधु, सोनी, नैंसी शामिल थीं। वे बच्चों से सामान्य सवाल पूछकर उनकी समझ और योग्यता के अनुसार कक्षा तय करते थे और फिर अभिभावकों को इसकी जानकारी देते थे।
प्रिंटिंग की विशेष सुविधा
एडमिशन टेस्ट के बाद अभिभावक अपने बच्चों के जरूरी डॉक्यूमेंट लेकर रजिस्ट्रेशन काउंटर पर पहुँचते थे।
यदि किसी अभिभावक के पास बच्चे का आधार कार्ड या जन्म प्रमाण पत्र की फोटोकॉपी नहीं होती थी, तो विद्यालय ने उनके लिए एक फ्री प्रिंट काउंटर की सुविधा दी थी।
इस काउंटर पर नित नारायण अभिभावकों को बच्चों के आधार कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र, आदि की फोटोकॉपी बिल्कुल निःशुल्क प्रिंट करके उन्हें दे रहे थे, जिससे किसी का भी एडमिशन न रुके।
रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया
इसके बाद अभिभावक अपने बच्चों को लेकर रजिस्ट्रेशन काउंटर पर पहुँचते थे, जहाँ रोहित सर और राजन सर बच्चों का पूरा रजिस्ट्रेशन करते थे। रजिस्ट्रेशन के दौरान बच्चों की पूरी जानकारी विद्यालय के रिकॉर्ड में दर्ज की जाती थी।
सत्यम सर सभी रजिस्टर किए गए बच्चों का डाटा एक जगह एकत्र करते थे और उसे रजिस्ट्रेशन रजिस्टर में सुरक्षित रूप से लिखते थे। रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद अभिभावकों को रजिस्ट्रेशन रसीद दी जाती थी। इसके साथ ही बच्चों को खुशी के रूप में चॉकलेट भी दी गई, जिससे बच्चों के चेहरे पर मुस्कान आ गई।
निःशुल्क नामांकन का उद्देश्य
विद्यालय के निदेशक राजन सर ने निःशुल्क नामांकन अभियान के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि— “हमारा मुख्य उद्देश्य यह है कि समाज का कोई भी बच्चा केवल पैसों की कमी के कारण शिक्षा से वंचित न रह जाए। आज भी बहुत से ऐसे प्रतिभाशाली बच्चे हैं, जिनमें आगे बढ़ने की पूरी क्षमता है, लेकिन आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्हें सही मार्गदर्शन और अच्छी शिक्षा नहीं मिल पाती। इस निःशुल्क नामांकन अभियान के माध्यम से हम ऐसे ही बच्चों तक पहुँचना चाहते हैं।” राजन सर ने आगे बताया कि सार्थक प्राइमरी एकेडमी केवल एक विद्यालय नहीं बल्कि बच्चों के भविष्य को गढ़ने का एक केंद्र है। यहाँ बच्चों को शुरू से ही अनुशासन, आत्मविश्वास और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की मजबूत नींव दी जाती है। उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि गाँव और छोटे शहरों के बच्चे भी बड़े सपने देखें और उन्हें पूरा करने का साहस रखें। हमारा प्रयास है कि हर बच्चा, चाहे वह किसी भी वर्ग से आता हो, रामकृष्ण मिशन, सैनिक स्कूल, नवोदय विद्यालय, सिमुलतला आवासीय विद्यालय तथा अन्य विद्यालय स्तरीय प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कर सके।”
विद्यालय के एकेडमिक एडवाइजर रोहित सर ने कहा कि- “हम बच्चों को केवल किताबी ज्ञान नहीं देते, बल्कि उन्हें अच्छे संस्कार, आत्मविश्वास और लक्ष्य के प्रति समर्पण भी सिखाते हैं। निःशुल्क नामांकन के जरिए हम अधिक से अधिक बच्चों को इस शिक्षा प्रणाली से जोड़ना चाहते हैं।”
रोहित सर ने अंत में कहा कि यह अभियान स्वामी विवेकानंद जी के विचारों से प्रेरित है, जिनका मानना था कि सही शिक्षा ही समाज और देश को मजबूत बनाती है।
सफल रहा निःशुल्क नामांकन अभियान
यह पूरा आयोजन बहुत ही सुव्यवस्थित और सफल रहा। अभिभावकों ने विद्यालय की इस पहल की सराहना की और कहा कि ऐसे प्रयास गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों के लिए बहुत मददगार साबित होते हैं। विद्यालय प्रबंधन ने बताया कि उनका उद्देश्य है कि हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले और वह अपने सपनों को पूरा कर सके।















