दिनांक 23 जनवरी 2026 को शहर के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान सार्थक प्राइमरी एकेडमी, सुपौल में विद्या, बुद्धि और कला की देवी माॅं सरस्वती की पूजा हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और भव्यता के साथ संपन्न हुई। दो दिवसीय इस धार्मिक–सांस्कृतिक आयोजन में विद्यालय परिवार, छात्र-छात्राएं, शिक्षक-शिक्षिकाएं, अभिभावक तथा स्थानीय श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। पूरा विद्यालय परिसर भक्ति, अनुशासन और सांस्कृतिक चेतना से ओत-प्रोत दिखाई दिया।
विद्यालय परिसर की भव्य सजावट
पूजा के अवसर पर विद्यालय को आकर्षक एवं सुसज्जित रूप दिया गया था। रंग-बिरंगे फूलों, हरी पत्तियों और सजावटी सामग्रियों से विद्यालय परिसर को मनोहारी बनाया गया। पूजा स्थल पर माॅं सरस्वती की भव्य प्रतिमा की स्थापना की गई, जिसे विशेष रूप से सजाया गया था। देवी के समक्ष फूल, फल, धूप-दीप और अगरबत्ती की सुसज्जित व्यवस्था ने पूरे वातावरण को पवित्र एवं आध्यात्मिक बना दिया। पूजा स्थल पर सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
सुबह 8 बजे विधिवत पूजा का शुभारंभ
पूजा का शुभारंभ सुबह 8:00 बजे विधिवत रूप से किया गया। इस मौके पर विद्यालय के निदेशक राजन सर, एकेडमिक एडवाइजर रोहित सर, सार्थक परिवार के सदस्य, शिक्षक-शिक्षिकाएं, छात्र-छात्राएं और अभिभावक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी श्रद्धालु पूजा स्थल पर एकत्र होकर माॅं सरस्वती की आराधना में लीन नजर आए।
मैथिली गीत से हुआ कार्यक्रम का शुभ आरंभ
कार्यक्रम की शुरुआत राजन सर की माताजी द्वारा गाए गए मधुर मैथिली गीत से हुई। उनका गीत इतना भावपूर्ण और मनमोहक था कि उपस्थित सभी लोग भाव-विभोर हो गए। इस गीत से पूरे कार्यक्रम में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ और सभी को यह विश्वास हुआ कि माॅं सरस्वती का आशीर्वाद इस आयोजन पर बना रहेगा। यह क्षण इस बात का प्रतीक था कि बुजुर्गों के आशीर्वाद से किसी भी आयोजन की सफलता सुनिश्चित होती है। बड़ों के साथ-साथ सार्थक परिवार ने भी पूरे मन से कार्यक्रम में सहयोग किया। कोई भगवती को चढ़ाने के लिए प्रसाद बना रहा था, तो कोई पूजा की सामग्री इकट्ठा करने में लगा हुआ था। सभी ने मिलकर काम किया, जिससे कार्यक्रम बहुत अच्छे और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हुआ।
दीपक ठाकुर सर ने निभाई मुख्य यजमान की भूमिका
इस पूजा में दीपक ठाकुर सर ने मुख्य यजमान की भूमिका निभाई। पंडित जी द्वारा वैदिक विधि-विधान से संस्कृत मंत्रों का उच्चारण किया गया। मंत्रोच्चार के साथ कलश स्थापना की गई, जिस पर लाल वस्त्र में लिपटा नारियल विधिवत रूप से स्थापित किया गया। दीपक ठाकुर सर के साथ सार्थक परिवार के सदस्यों ने मंत्रों का सामूहिक उच्चारण किया। छात्र-छात्राएं पूरे मनोयोग से पूजा में सम्मिलित रहे और माॅं सरस्वती से विद्या, विवेक और सद्बुद्धि की कामना करते रहे।
छात्र-छात्राओं ने माॅं सरस्वती से की विद्या की प्रार्थना
पूजा के दौरान सभी छात्र-छात्राएं शांत भाव से हाथ जोड़कर बैठे रहे। वे मन ही मन मां सरस्वती से विद्या, बुद्धि और अच्छे भविष्य की कामना कर रहे थे। यह दृश्य बहुत ही अनुशासित और प्रेरणादायक था। विद्यालय परिवार इस बात का विशेष ध्यान रख रहा था कि पूजा में किसी भी प्रकार की कमी न रह जाए।
विद्यालय प्रबंधन की विशेष प्रार्थना
पूजा के दौरान राजन सर हाथ जोड़कर माॅं सरस्वती से मन ही मन प्रार्थना कर रहे थे। वे माॅं से बच्चों पर अपनी विशेष कृपा बनाए रखने की कामना कर रहे थे। उन्होंने माॅं से प्रार्थना की कि बच्चों को विद्या का ज्ञान मिले, सही और गलत की पहचान हो, ताकि वे आगे चलकर एक जिम्मेदार नागरिक बनें और अपना जीवन देश सेवा में लगाएं।
वहीं रोहित सर भी मन ही मन बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना कर रहे थे। वे माॅं सरस्वती से प्रार्थना कर रहे थे कि जिस तरह माॅं उन पर कृपा करती हैं, उसी तरह इन नन्हे-मुन्ने बच्चों पर भी अपनी कृपा बनाए रखें। साथ ही उन्होंने वहां उपस्थित सभी लोगों की मनोकामनाएं पूरी करने, उन्हें शक्ति, विद्या और देश सेवा की भावना प्रदान करने की प्रार्थना की।
माॅं सरस्वती के दर्शन और विशेष पूजन
पूजा विधि का एक महत्वपूर्ण भाग पूरा होने के बाद अब माॅं सरस्वती के मुख दर्शन की बारी आई। जैसे ही पूजा का यह चरण संपन्न हुआ, पंडित जी ने दीपक ठाकुर सर और रोहित सर को माॅं सरस्वती के चेहरे से वस्त्र हटाने की आज्ञा दी, ताकि सभी श्रद्धालु दर्शन कर सकें। पंडित जी की आज्ञा मिलते ही दीपक ठाकुर सर और रोहित सर ने विधिवत रूप से माॅं के मुख से वस्त्र हटाया और सभी को दर्शन कराए।
इसके बाद मंत्रोच्चारण का अगला क्रम शुरू हुआ। पंडित जी लगातार संस्कृत मंत्रों का उच्चारण करते रहे। उन्होंने विशेष मंत्रों का पाठ किया, जिनके बारे में माना जाता है कि उनसे माॅं सरस्वती शीघ्र प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को मनचाहा फल प्रदान करती हैं।
इसके बाद पंडित जी की आज्ञा पाकर रोहित सर और दीपक ठाकुर सर ने माॅं सरस्वती को चुनरी ओढ़ाई और फूलों की माला पहनाई। विधि-विधान के साथ यह कार्य पूरा किया गया। इसके साथ ही पूजा का यह चरण भी सफलतापूर्वक संपन्न हुआ और पूरे वातावरण में श्रद्धा व भक्ति का भाव बना रहा।
पुस्तकों का पूजन और भक्ति गीत
इसके बाद पंडित जी ने मंत्रों का उच्चारण किया और सतीश सर को निर्देश दिया कि वे छात्र-छात्राओं की पुस्तकों को एकत्र कर एक स्थान पर रखें और उन्हें माॅं सरस्वती को समर्पित करें। सतीश सर ने विद्यार्थियों से पुस्तकें लेकर विधिवत रूप से माॅं के चरणों में अर्पित कीं।
इसके बाद पंडित जी ने पुनः मंत्रों का उच्चारण किया और पूजा का यह भाग भी पूर्ण कराया। अंत में रोहित सर ने माॅं सरस्वती के जयकारे लगाने शुरू किए, जिससे पूरा पूजा स्थल और अधिक पवित्र और भक्तिमय हो गया। वहां उपस्थित सभी लोग खुशी और श्रद्धा के साथ माॅं के नाम के जयकारे लगाने लगे।
इसके बाद पूजा का अगला चरण शुरू हुआ। पंडित जी ने मंत्रों का उच्चारण किया और सतीश सर तथा अजीत सर को निर्देश दिया कि वे सभी श्रद्धालुओं के बीच अभिमंत्रित पुष्पों का वितरण करें। इसके बाद सभी ने बारी-बारी से माॅं सरस्वती को पुष्प अर्पित किए और पुष्पों की वर्षा की।
इसके पश्चात छात्र-छात्राएं, शिक्षक और अभिभावक सभी हाथ जोड़कर माॅं के सामने खड़े हो गए और प्रार्थना करने लगे। इस दौरान पंडित जी लगातार मंत्रों का उच्चारण करते रहे। वहीं रोहित सर ने प्रार्थना गीत “वर दे वीणा वादिनी” का गायन शुरू किया, जिसे छात्र-छात्राओं ने उनके साथ मिलकर गाया। इस भक्ति गीत से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया और पूजा का यह भाग भी विधिवत रूप से संपन्न हुआ।
आरती, प्रसाद और सामूहिक भोजन
इसके बाद पंडित जी मंत्रों का उच्चारण करते रहे और दीपक ठाकुर सर माॅं सरस्वती की विधिवत आरती कर रहे थे। इस दौरान सभी श्रद्धालुओं ने एक साथ “त्वमेव माता च पिता” प्रार्थना गीत का गायन किया। आरती के बाद माता रानी के जयकारे लगाए गए, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया और पूजा का यह चरण संपन्न हुआ।
इसके पश्चात वहां उपस्थित सभी अभिभावक, शिक्षक, छात्र-छात्राएं और अन्य श्रद्धालुओं ने बारी-बारी से माॅं सरस्वती की पूजा की। सभी ने श्रद्धा और विश्वास के साथ माॅं का आशीर्वाद प्राप्त किया।
अंत में सभी श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया और सभी को भोजन कराया गया। इस प्रकार दिनांक 23/01/26 को आयोजित यह धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
दूसरे दिन भजन-कीर्तन और हवन का आयोजन
दिनांक 24/01/26, पूजा के अगले दिन कार्यक्रम का आगे का भाग शुरू हुआ। सुबह करीब 8:00 बजे से ही पंडित जी, सार्थक परिवार, शिक्षक-शिक्षिकाएं, छात्र-छात्राएं तथा उनके अभिभावक पूजा स्थल पर उपस्थित थे। पंडित जी संस्कृत मंत्रों का उच्चारण करते हुए पूजा विधि को आगे बढ़ा रहे थे। सभी श्रद्धालु हाथ जोड़कर माॅं सरस्वती के पास बैठे हुए थे।
मंत्रोच्चारण के बाद रोहित सर ने “हमको दयामयी तुम गोद में लेकर पढ़ाओ, मां सरस्वती कहां तू वीणा बजा रही है” जैसे भक्ति गीत गाकर मां सरस्वती की आराधना की। इसके बाद माॅं सरस्वती के जयकारे लगाए गए।
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के निदेशक राजन सर की धर्मपत्नी चांदनी, उनकी छोटी बहन, सतीश सर की धर्मपत्नी मेघा तथा विद्यालय की शिक्षिकाओं ने मिलकर मैथिली और हिंदी भक्ति गीत प्रस्तुत किए। उन्होंने “जय महिषासुर मर्दिनी” और “जय जय जगदंब भवानी” जैसे गीत गाकर पूजा का माहौल और भी भक्तिमय व आनंदमय बना दिया।
इसी दौरान पंडित जी ने रोहित सर सहित सभी शिक्षकों के दाहिने हाथ में अभिमंत्रित कलावा बांधा। भक्ति गीतों के साथ पूजा का यह चरण भी विधिवत रूप से पूर्ण हुआ।
हवन कार्यक्रम में सभी की सहभागिता
इसके बाद पूजा का मुख्य भाग हवन प्रारंभ हुआ। सार्थक परिवार के सदस्यों ने हवन की सभी सामग्री को एक स्थान पर एकत्र किया। पंडित जी हवन की तैयारी में जुटे हुए थे। जैसे ही मंत्रोच्चारण शुरू हुआ, पंडित जी के निर्देश पर दीपक ठाकुर सर ने मंत्र पढ़ते हुए हवन कुंड में अग्नि प्रज्वलित की।
सतीश सर ने हवन की सामग्री को सही ढंग से एकत्र कर हवन स्थल पर पहुंचाया, ताकि किसी प्रकार की कमी न रह जाए। इसके बाद पंडित जी मंत्र पढ़ते रहे और दीपक ठाकुर सर हवन कुंड में सामग्री डालकर आहुतियां देते रहे। इसके साथ ही सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं ने भी मंत्रों का उच्चारण करते हुए हवन में आहुति दी। सार्थक परिवार के सदस्य, अभिभावक और श्रद्धालुओं ने भी आहुति देकर पूजा को सफल बनाया। अंत में छात्र-छात्राओं ने भी आहुति दी और इस प्रकार हवन का कार्यक्रम पूर्ण हुआ।
हवन के समापन के बाद दीपक ठाकुर सर ने माॅं सरस्वती की आरती की। इस दौरान पंडित जी मंत्रों का उच्चारण करते रहे। आरती के बाद माॅं सरस्वती के जयकारे लगाए गए, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
अंत में सभी ने माॅं सरस्वती की पूजा की, उनसे आशीर्वाद मांगा और अपनी भूल-चूक के लिए क्षमा याचना की। इस प्रकार पूजा और हवन का यह संपूर्ण कार्यक्रम श्रद्धा और शांति के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
माॅं सरस्वती की विदाई और विसर्जन
इसके बाद माॅं सरस्वती की विदाई का कार्यक्रम शुरू हुआ। माॅं सरस्वती की प्रतिमा को विद्यालय के पास स्थित जलाशय में विसर्जन के लिए ले जाने की तैयारी की गई। इस अवसर पर सभी शिक्षक-शिक्षिकाएं, छात्र-छात्राएं और सार्थक परिवार के सदस्य खुशी और श्रद्धा के साथ माॅं सरस्वती को विदा करने के लिए उपस्थित रहे। सभी ने नृत्य किया, माॅं के नाम के जयकारे लगाए और एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाया।
इस दौरान श्रद्धालुओं ने स्मृति के रूप में माॅं सरस्वती के साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं। इसके बाद सभी ने माॅं को प्रणाम किया। रोहित सर, राजन सर और सार्थक परिवार के सदस्यों ने मिलकर माॅं की प्रतिमा को उठाया और पूजा स्थल से बाहर विद्यालय परिसर तक ले गए। वहां रोहित सर के नेतृत्व में माॅं के जयकारे लगाए गए, जिनमें सभी भक्तजनों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया।
इसके बाद सार्थक परिवार ने माॅं सरस्वती की प्रतिमा को वाहन पर बैठाया। राजन सर ने वाहन को सावधानीपूर्वक चलाते हुए पहले हॉस्टल परिसर और फिर विद्यालय के पास स्थित जलाशय तक पहुंचाया। पूरे मार्ग में छात्र-छात्राएं और श्रद्धालु माॅं सरस्वती के नाम के जयकारे लगाते रहे।
जलाशय पहुंचने पर सार्थक परिवार ने माॅं की प्रतिमा को वाहन से उतारा और श्रद्धा के साथ जलाशय तक ले गए। जयकारे लगाते हुए माॅं सरस्वती की मूर्ति का विधिवत विसर्जन किया गया। अंत में सभी ने हाथ जोड़कर पूजा के दौरान हुई किसी भी भूल के लिए माॅं सरस्वती से क्षमा मांगी। इस प्रकार इस वर्ष का सरस्वती पूजा का कार्यक्रम शांतिपूर्ण और श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ।
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