सार्थक प्राइमरी एकेडमी में शनिवार के दिन का विशेष महत्व

सार्थक प्राइमरी एकेडमी में शनिवार का दिन छात्र-छात्राओं के लिए सामान्य दिनों से अलग और विशेष महत्व रखता है। जहां सोमवार से शुक्रवार तक विद्यालय में विद्यार्थियों को विभिन्न विषयों और पाठ्यक्रमों का अध्ययन कराया जाता है, वहीं शनिवार के दिन विद्यार्थियों को अपनी तैयारी को परखने और अपनी गलतियों से सीखकर स्वयं को बेहतर बनाने का अवसर दिया जाता है। इस दिन विद्यालय में कक्षा नर्सरी से लेकर कक्षा 6 तक के विद्यार्थियों की साप्ताहिक परीक्षा आयोजित की जाती है।
विद्यालय प्रबंधन के अनुसार, इस साप्ताहिक परीक्षा का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को अंक देना नहीं, बल्कि उनके अंदर नियमित अध्ययन, आत्मअनुशासन, आत्ममूल्यांकन और सुधार की भावना विकसित करना है। विद्यार्थियों को पहले से यह जानकारी दी जाती है कि सोमवार से शुक्रवार तक कक्षा में जो कुछ पढ़ाया गया है, उसी से शनिवार को परीक्षा ली जाएगी। हालांकि, परीक्षा से पहले यह नहीं बताया जाता कि किस विषय की परीक्षा होगी। इसके पीछे विद्यालय का उद्देश्य यह है कि विद्यार्थी किसी एक विषय की तैयारी तक सीमित न रहें, बल्कि पूरे सप्ताह पढ़ाए गए सभी विषयों और टॉपिक का अभ्यास करके आएं। इससे बच्चों को यह समझने में मदद मिलती है कि उन्होंने पूरे सप्ताह में क्या सीखा और उन्हें किन विषयों में और मेहनत करने की जरूरत है। विद्यालय में इसी प्रक्रिया के तहत पूरे महीने साप्ताहिक परीक्षाओं का आयोजन किया जाता है। इस प्रकार नियमित रूप से परीक्षा होने से बच्चों में पढ़ाई के प्रति जिम्मेदारी बढ़ती है और वे हर दिन कक्षा में पढ़ाई गई चीजों को ध्यान से समझने का प्रयास करते हैं। 

शुक्रवार से शुरू हो जाती है परीक्षा की तैयारी:
शनिवार की परीक्षा की पूरी तैयारी विद्यालय में शुक्रवार को ही पूरी कर ली जाती है। परीक्षा की तैयारी और व्यवस्था में विद्यालय प्रबंधन की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। परीक्षा से पहले सतीश सर सभी कक्षाओं के लिए परीक्षा संबंधी डाटा तैयार करते हैं। इससे परीक्षा से पहले सभी शिक्षकों को पूरी जानकारी मिलती है और परीक्षा को व्यवस्थित तरीके से कराया जाता है। इसमें यह तय किया जाता है कि शनिवार को किस कक्षा में कौन-सा शिक्षक परीक्षा की ड्यूटी संभालेगा।
इस व्यवस्था की खास बात यह है कि शिक्षकों की ड्यूटी समय-समय पर बदली जाती है। उदाहरण के तौर पर एक शनिवार को यदि किसी शिक्षक की ड्यूटी कक्षा 4 में लगाई गई है, तो अगले शनिवार उसी कक्षा में किसी दूसरे शिक्षक की ड्यूटी लगाई जाती है। इससे परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और अनुशासन बनाए रखने का प्रयास किया जाता है। इसके साथ ही यह भी निर्धारित किया जाता है कि किस कक्षा में किस विषय की परीक्षा आयोजित की जाएगी। संबंधित शिक्षक शुक्रवार को परीक्षा के लिए प्रश्न पत्र तैयार करते हैं। 
प्रश्न पत्र सामान्यतः 50 अंकों का होता है, जिसमें विद्यार्थियों की विभिन्न प्रकार की समझ को परखने के लिए Objective Questions, Fill in the Blanks, Matching, True/False, One Word Answer, Short Answer, One Sentence Questions तथा Long Answer Questions शामिल किए जाते हैं।
इस प्रकार प्रश्न पत्र में विभिन्न प्रकार के प्रश्न रखे जाते हैं, ताकि विद्यार्थी केवल किसी एक तरह के प्रश्नों तक सीमित न रहें और उन्हें अलग-अलग प्रकार के प्रश्नों को समझने तथा हल करने का अभ्यास हो।

कंप्यूटर और प्रिंटर के माध्यम से तैयार होते हैं प्रश्न पत्र:
प्रश्न पत्र तैयार होने के बाद संबंधित कक्षाओं के शिक्षक अपने-अपने प्रश्न पत्र सतीश सर को सौंपते हैं। इसके बाद प्रश्न पत्रों को विद्यालय के कंप्यूटर ऑपरेटर नित नारायण के पास भेजा जाता है। नित नारायण द्वारा सभी प्रश्न पत्रों को MS Word जैसे कंप्यूटर प्रोग्राम की सहायता से व्यवस्थित रूप से तैयार किया जाता है।
सभी कक्षाओं के प्रश्न पत्र तैयार होने के बाद विद्यार्थियों की संख्या के अनुसार उनकी प्रतियां प्रिंट की जाती हैं। इसके लिए विद्यालय के कंप्यूटर और प्रिंटर का उपयोग किया जाता है। प्रिंट होने के बाद सभी कक्षाओं के प्रश्न पत्रों को अलग-अलग व्यवस्थित कर पैक किया जाता है और सुरक्षित रूप से विद्यालय के कार्यालय कक्ष में रखा जाता है।
विद्यालय में परीक्षा से संबंधित इस पूरी प्रक्रिया को CCTV और सुमन सर की निगरानी में संपन्न किया जाता है। परीक्षा की तैयारियों और पूरी प्रक्रिया की जानकारी समय-समय पर सुमन सर द्वारा विद्यालय के निदेशक राजन सर को दी जाती है। इस तरह शुक्रवार को परीक्षा से संबंधित सभी तैयारियां पूरी कर ली जाती हैं।

शनिवार को निर्धारित समय पर शुरू होती है परीक्षा:
शनिवार को प्रथम Period में विद्यार्थियों की नियमित कक्षा संचालित की जाती है। इसके बाद द्वितीय Period से साप्ताहिक परीक्षा शुरू होती है। सतीश सर द्वारा तैयार किए गए ड्यूटी डाटा के अनुसार सभी शिक्षक अपनी निर्धारित कक्षाओं में पहुंच जाते हैं।
सभी शिक्षकों के कक्षाओं में पहुंचने के बाद सतीश सर द्वारा संबंधित प्रश्न पत्र सभी कक्षाओं तक पहुंचाए जाते हैं और निर्धारित समय पर परीक्षा शुरू कराई जाती है।
परीक्षा शुरू होने से पहले विद्यार्थियों की आवश्यक जांच भी की जाती है, ताकि कोई छात्र ऐसी सामग्री लेकर परीक्षा कक्ष में न आए जिसका उपयोग अनुचित तरीके से किया जा सकता हो। विद्यालय की ओर से विद्यार्थियों को परीक्षा से एक दिन पहले ही समझाया जाता है कि परीक्षा में किसी प्रकार की नकल न करें। उन्हें बताया जाता है कि यह परीक्षा उन्हें परेशान करने या केवल अंक देने के लिए नहीं, बल्कि उनकी कमियों को पहचानने और उन्हें सुधारने के लिए आयोजित की जा रही है।

परीक्षा के बाद शुरू होता है मूल्यांकन का दौर:
विद्यालय में साप्ताहिक परीक्षा निर्धारित समय के अनुसार लगभग एक घंटे तक आयोजित की जाती है। परीक्षा समाप्त होने के बाद सभी शिक्षक अपने-अपने कक्षाओं में विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाएं क्रमवार एकत्रित करते हैं और उन्हें सतीश सर के पास जमा करते हैं।
इसके बाद सतीश सर संबंधित विषय के शिक्षकों को उनकी कक्षा की उत्तर पुस्तिकाएं उपलब्ध कराते हैं। विषय शिक्षक उत्तर पुस्तिकाओं की जांच करते हैं और विद्यार्थियों के प्रदर्शन के आधार पर उन्हें अंक प्रदान करते हैं। जांच पूरी होने के बाद विद्यार्थियों के प्राप्तांकों को Register में दर्ज किया जाता है, जिससे प्रत्येक विद्यार्थी के प्रदर्शन का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जा सके।

गलतियों से सीखने पर दिया जाता है विशेष जोर: 
उत्तर पुस्तिकाओं की जांच और अंक दर्ज करने के बाद उन्हें विद्यार्थियों के बीच वापस वितरित किया जाता है। इसके बाद शिक्षक विद्यार्थियों को उनकी गलतियों के बारे में समझाते हैं। उन्हें बताया जाता है कि उन्होंने किस प्रश्न में गलती की और उस गलती को किस प्रकार सुधारा जा सकता है।
विद्यालय की इस प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि परीक्षा को केवल परिणाम तक सीमित नहीं रखा जाता। विद्यार्थियों को उनकी गलतियों को समझने और भविष्य में उन्हें दोबारा न दोहराने के लिए प्रेरित किया जाता है। इससे परीक्षा विद्यार्थियों के लिए सीखने और स्वयं में सुधार करने का माध्यम बन जाती है।

बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को किया जाता है सम्मानित:
साप्ताहिक परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों का मनोबल बढ़ाने के लिए प्रत्येक कक्षा में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार भी दिया जाता है। पुरस्कार के रूप में किताब, कॉपी, पेन और पेंसिल जैसी उपयोगी अध्ययन सामग्री प्रदान की जाती है।
वहीं, जो विद्यार्थी प्रथम, द्वितीय या तृतीय स्थान प्राप्त नहीं कर पाते हैं, उन्हें निराश होने के बजाय अपनी गलतियों से सीखने और अगली परीक्षा के लिए अधिक मेहनत करने के लिए प्रेरित किया जाता है। विद्यार्थियों को समझाया जाता है कि एक परीक्षा का परिणाम अंतिम नहीं होता, बल्कि प्रत्येक परीक्षा उन्हें अपने प्रदर्शन को बेहतर करने का एक नया अवसर देती है।
इस प्रकार सार्थक प्राइमरी एकेडमी में शनिवार केवल सप्ताह का अंतिम शैक्षणिक दिन नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के लिए आत्ममूल्यांकन, अनुशासन और सुधार का महत्वपूर्ण दिन है। सोमवार से शुक्रवार तक जहां विद्यार्थी कक्षा में नई चीजें सीखते हैं, वहीं शनिवार को परीक्षा के माध्यम से वे यह जानने का प्रयास करते हैं कि पूरे सप्ताह में उन्होंने कितना सीखा और किन विषयों में उन्हें अभी और मेहनत करने की आवश्यकता है। यही कारण है कि सार्थक प्राइमरी एकेडमी में शनिवार का दिन विद्यार्थियों के लिए केवल परीक्षा का दिन नहीं, बल्कि सीखने, स्वयं को परखने और स्वयं को बेहतर बनाने का दिन है।
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